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पहले हिन्दु-मुस्लिम दंगा अब एकजूट होकर मुहल्ले की पहरेदारी, आखिर दिल्ली दंगे का जिम्मेदार कौन?

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delhi riots
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अब दिल्ली में हिन्दु-मुस्लीम एकजूट होकर दंगाईयों से अपने मुहल्ले की पहरेदारी कर रहे हैं। तो फिर ये दंगाई हैं कौन? क्या ये पाकिस्तान से सप्लाई किये जा रहे हैं? या ट्रंप अपने झोली में भर कर लाए थे… भारत में छोड़ गए।

इन दंगाइयों द्वारा लोगों के घरों में घुसकर मारपीट करना, पेट्रोल पंप, कार बसें एवं अन्य पब्लिक प्रोपर्टी को आग के हवाले कर देना, तोड़-फोड़ कर तहस-नहस कर देना… क्या इन्हें अंग्रेजी के शब्द ‘पब्लिक प्रोपर्टी’ का मतलब नहीं पता है? हां! तभी तो ये पब्लिक प्रोपर्टी को सरकारी संपत्ती समझते हैं और इन्हें लगता है कि इसे तोड़-फोड़ कर हम सरकार का बड़ा नुकसान कर रहे हैं. ये हमारे टेक्स के पैसों से बनी संपत्ती नहीं है…इस संपत्ती से हमें कोई फायदा-नूकसान नहीं है.

क्या विरोध और प्रदर्शन का मतलब सिर्फ हिंसा है? लोगों के घरों में घुसकर मारपीट करना, पुलिस और पत्रकारों पर जानलेवा हमला करना, पत्थर फेंकना, उन्हें जान से मार देना क्या ये विरोध प्रदर्शन है? माहौल कुछ ऐसा बना दिया गया है जिसे देख कर लगता है- सामने कोई हिन्दी सिनेमा चल रहा हो।

हां! सीन को समझियेगा- चुनावी रैली के दौरान सरेआम एक नेता गोली मारो सालो को का नारा देता है। फिर गोली चलती है। दिल्ली पुलिस कमिश्नर को अपने बगल में खड़ा करके सरेआम भड़काऊं भाषण देता है। जिसपर कोई एफआईआर दर्ज तक नहीं होती…एक जज़ जो केस दर्ज करने का आदेश देता है उसकी रातोंरात तबादला कर दी जाती है। खैर! दूसरा पक्ष जो सरेआम खुले मंच से देश के अल्पसंख्यकों को एकजूट करके भारत से असम को अलग करने की बात करता है (शरजील इमाम)..हिन्दुस्तान के टूकड़े करना का ख्वाब देखता है। कोई एक विशेष धर्म के लोगों की कब्र खोदने का नारा बुलंद करता है तो कोई हिन्दुस्तान की गलियों में खुन बहाने की बात करता है।

हां! ऐसे धुआंधार डॉयलग्स और सीन तो किसी हिन्दी सिनेमा में ही हो सकता है। गांधी के देश में तो इसका किसी ने परिकल्पना भी नहीं किया होगा। किसी को लगता है हिन्दुत्व खतरे में है तो किसी को लगता है इस्लाम खतरे में है…बस! हाथों में पत्थर और पेट्रोल बम लेकर अपना-अपना धर्म बचाने निकल पड़ते हैं। नतीजा? इंसानियत के चश्में से देखें तो आज पुरा हिन्दुस्तान खतरे में है। अंत में फिर वही सवाल कि आखिर ! इस खतरे (दंगे) का जिम्मेदार कौन?
हिन्दु-मुस्लिम, नेता, धर्म, इंसानों में इंसानियत की कमी या फिर पाकिस्तान या डोनाल्ड ट्रंप?